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बिना दरà¥à¤¦ के डिलीवरी करवाने के साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸
शायद इस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में लेबर पेन से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• और कà¥à¤› नहीं होगा। कहते हैं कि à¤à¤• बचà¥â€à¤šà¥‡ को जनà¥â€à¤® देने में जितना दरà¥à¤¦ होता है, उतना किसी और चीज में नहीं होता है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा के दरà¥à¤¦ को कम करने के लिठकई विकलà¥â€à¤ª मौजूद हैं जिनमें à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल और सà¥â€à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² बà¥â€à¤²à¥‰à¤• शामिल है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में डिलीवरी के दरà¥à¤¦ को कम करने के इन तरीकों का कम इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है, लेकिन फिर à¤à¥€ आपके लिठयह जानना जरूरी है कि à¤à¤¸à¤¾ कोई विकलà¥â€à¤ª मौजूद है।
à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल बà¥â€à¤²à¥‰à¤•
विदेशों में लेबर पेन को कम करने के लिठइस तरीके का सबसे जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। इसमें दरà¥à¤¦ निवारक और संवेदनातà¥â€à¤®à¤• गà¥à¤£ होते हैं। à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल à¤à¤• टयूब जैसा उपकरण है जिसे पीठमें लगाया जाता है। दरà¥à¤¦ के संकेतों को मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤• तक पहà¥à¤‚चने से दवा रोक देती है। इंजेकà¥â€à¤¶à¤¨ लगने के बाद महिला को पेट के नीचे जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कà¥à¤› महसूस नहीं होता है और वो होश में रहते हà¥à¤ à¤à¥€ पà¥à¤¶ कर पाती है।
नॉरà¥à¤®à¤² और सिजेरियन के अलावा और à¤à¥€ कई तरीकों से हो सकती है डिलीवरी
यह पà¥à¤°à¤¸à¤µ का सबसे आम तरीका है और इस तरह की डिलीवरी को सबसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और फायदेमंद माना जाता है। इसमें दरà¥à¤¦ को कम करने या पà¥à¤°à¤¸à¤µ को जलà¥â€à¤¦à¥€ करने के लिठकिसी à¤à¥€ तरह की दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। कà¥à¤› महिलाओं को शिशॠकी हारà¥à¤Ÿ रेट मॉनिटर करने जैसी मेडिकल हेलà¥â€à¤ª की जरूरत पड़ सकती है।
नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी को महिलाओं के लिठसबसे सही माना जाता है, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है।
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यदि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में कोई परेशानी हो तो सिजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में मां के पेट पर कट लगाकर बचà¥â€à¤šà¥‡ को बाहर निकाला जाता है। यह à¤à¤• बड़ा ऑपरेशन होता है। कई महिलाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा से बचने के लिठसिजेरियन का विकलà¥â€à¤ª पहले से ही चà¥à¤¨ लेती हैं।
वहीं, अगर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान किसी तरह की जटिलता का पता चले या पेट में जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ या तीन बचà¥â€à¤šà¥‡ हों या बचà¥â€à¤šà¤¾ उलà¥â€à¤Ÿà¤¾ हो गया हो तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। इस सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को रिकवर करने में अधिक समय लगता है।
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इसमें कई तरह से डिलीवरी करवाई जाती है, जैसे कि :
फोरसेपà¥â€à¤¸ : बड़े चमà¥â€à¤®à¤š जैसा दिखने वाला उपकरण जिसे फोरसेपà¥â€à¤¸ कहते हैं। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° इससे शिशॠके सिर को पकड़ कर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर निकालते हैं।वैकà¥â€à¤¯à¥‚म à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥â€à¤¶à¤¨ : फोरसेपà¥â€à¤¸ की तरह ही वैकà¥â€à¤¯à¥‚म डिलीवरी होती है। इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° शिशॠके सिर पर पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• कप लगाकर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर खींचते हैं।à¤à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤“टोमी : इसमें योनि मà¥à¤– और गà¥à¤¦à¤¾ के बीच के ऊतक पर à¤à¤• कट लगाया जाता है। इस ऊतक को पेरिनियम कहते हैं। जब शिशॠको जलà¥â€à¤¦à¥€ से डिलीवर करवाना होता है, तà¤à¥€ इस तरह की डिलीवरी करवाई जाती है।à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टोमी : इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टिक थैली के खà¥à¤²à¤¨à¥‡ वाली जगह पर à¤à¤• छोटा पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• हà¥à¤• लगाते हैं। इसमें योनि से तेजी से पानी निकलता है।
हो सकता है कि जिन महिलाओं की पहले सिजेरियन डिलीवरी हà¥à¤ˆ हो, उनकी बाद में नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो। जब तक लेबर पेन शà¥à¤°à¥‚ नहीं होता, तब तक सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया जाता है। पहली बार में ऑपरेशन से डिलीवरी होने पर दूसरी बार नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो तो यूटà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ रपà¥â€à¤šà¤° का खतरा रहता है।
इस तरह कई पà¥à¤°à¤•ार की डिलीवरी होती हैं और पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के आधार पर ही डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° यह तय करते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की किस तरह की डिलीवरी करनी है।
सà¥â€à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² बà¥â€à¤²à¥‰à¤•
सà¥â€à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² बà¥â€à¤²à¥‰à¤• पेट के नीचे के हिसà¥â€à¤¸à¥‡ को सà¥à¤¨à¥â€à¤¨ कर देता है लेकिन इसमें दवा रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के आसपास फà¥à¤²à¥‚इड के रूप में à¤à¤• शॉट दिया जाता है। ये जलà¥â€à¤¦à¥€ असर करता है लेकिन इसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ सिरà¥à¤« à¤à¤• या दो घंटे के लिठरहता है।
इसके अलावा सà¥â€à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² और à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल बà¥â€à¤²à¥‰à¤• को à¤à¤• साथ à¤à¥€ लिया जा सकता है। इसमें दोनों पà¥à¤°à¤•ार के à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ का फायदा मिलता है। ये जलà¥â€à¤¦à¥€ काम करता है और इसमें अधिक समय तक दरà¥à¤¦ महसूस नहीं होता है।
à¤à¤²à¥‡ ही इस तरह लेबर पेन कम हो जाता हो, लेकिन इसके कà¥à¤› साइड इफेकà¥â€à¤Ÿ à¤à¥€ होते हैं।
खà¥à¤œà¤²à¥€ और मतली
à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल में इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाली कà¥à¤› दवाओं की वजह से खà¥à¤œà¤²à¥€ हो सकती है। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° खà¥à¤œà¤²à¥€ से राहत पाने के लिठदवा दे सकते हैं। ओपोइड दरà¥à¤¦ निवारक दवाओं के कारण कà¤à¥€-कà¤à¥€ पेट खराब हो सकता है और आपको मतली या उलà¥â€à¤Ÿà¥€ हो सकती है।
नॉरà¥à¤®à¤² और सिजेरियन के अलावा और à¤à¥€ कई तरीकों से हो सकती है डिलीवरी
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यह पà¥à¤°à¤¸à¤µ का सबसे आम तरीका है और इस तरह की डिलीवरी को सबसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और फायदेमंद माना जाता है। इसमें दरà¥à¤¦ को कम करने या पà¥à¤°à¤¸à¤µ को जलà¥â€à¤¦à¥€ करने के लिठकिसी à¤à¥€ तरह की दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। कà¥à¤› महिलाओं को शिशॠकी हारà¥à¤Ÿ रेट मॉनिटर करने जैसी मेडिकल हेलà¥â€à¤ª की जरूरत पड़ सकती है।
नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी को महिलाओं के लिठसबसे सही माना जाता है, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है।
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यदि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में कोई परेशानी हो तो सिजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में मां के पेट पर कट लगाकर बचà¥â€à¤šà¥‡ को बाहर निकाला जाता है। यह à¤à¤• बड़ा ऑपरेशन होता है। कई महिलाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा से बचने के लिठसिजेरियन का विकलà¥â€à¤ª पहले से ही चà¥à¤¨ लेती हैं।
वहीं, अगर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान किसी तरह की जटिलता का पता चले या पेट में जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ या तीन बचà¥â€à¤šà¥‡ हों या बचà¥â€à¤šà¤¾ उलà¥â€à¤Ÿà¤¾ हो गया हो तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। इस सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को रिकवर करने में अधिक समय लगता है।
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इसमें कई तरह से डिलीवरी करवाई जाती है, जैसे कि :
फोरसेपà¥â€à¤¸ : बड़े चमà¥â€à¤®à¤š जैसा दिखने वाला उपकरण जिसे फोरसेपà¥â€à¤¸ कहते हैं। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° इससे शिशॠके सिर को पकड़ कर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर निकालते हैं।वैकà¥â€à¤¯à¥‚म à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥â€à¤¶à¤¨ : फोरसेपà¥â€à¤¸ की तरह ही वैकà¥â€à¤¯à¥‚म डिलीवरी होती है। इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° शिशॠके सिर पर पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• कप लगाकर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर खींचते हैं।à¤à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤“टोमी : इसमें योनि मà¥à¤– और गà¥à¤¦à¤¾ के बीच के ऊतक पर à¤à¤• कट लगाया जाता है। इस ऊतक को पेरिनियम कहते हैं। जब शिशॠको जलà¥â€à¤¦à¥€ से डिलीवर करवाना होता है, तà¤à¥€ इस तरह की डिलीवरी करवाई जाती है।à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टोमी : इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टिक थैली के खà¥à¤²à¤¨à¥‡ वाली जगह पर à¤à¤• छोटा पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• हà¥à¤• लगाते हैं। इसमें योनि से तेजी से पानी निकलता है।
हो सकता है कि जिन महिलाओं की पहले सिजेरियन डिलीवरी हà¥à¤ˆ हो, उनकी बाद में नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो। जब तक लेबर पेन शà¥à¤°à¥‚ नहीं होता, तब तक सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया जाता है। पहली बार में ऑपरेशन से डिलीवरी होने पर दूसरी बार नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो तो यूटà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ रपà¥â€à¤šà¤° का खतरा रहता है।
इस तरह कई पà¥à¤°à¤•ार की डिलीवरी होती हैं और पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के आधार पर ही डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° यह तय करते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की किस तरह की डिलीवरी करनी है।
लो बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°
à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल बà¥â€à¤²à¥‰à¤• लेने वाली लगà¤à¤— 14 फीसदी महिलाओं के बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के लेवल में गिरावट आई। à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल बà¥â€à¤²à¥‰à¤• रकà¥â€à¤¤ वाहिकाओं के अंदर मांसपेशियों के संकà¥à¤šà¤¨ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने वाले नसों के फाइबर को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इससे रकà¥â€à¤¤ वाहिकाà¤à¤‚ रिलैकà¥â€à¤¸ हो जाती हैं और बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° नीचे आ जाता है।
पेशाब करने में दिकà¥â€à¤•त
à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल के बाद मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ को à¤à¤°à¤¨à¥‡ वाली नसें सà¥à¤¨à¥â€à¤¨ हो जाती हैं। मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ को खाली करने के लिठकैथेटर लगवाना पड़ सकता है। à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल हटाने के बाद सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पहले की तरह ही हो जाती है।
इसके कà¥à¤› दà¥à¤°à¥à¤²à¤ दà¥à¤·à¥â€à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त और तेज सिरदरà¥à¤¦
कà¥à¤› दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मामलों में à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ सांस लेने में मदद करने वाली छाती की मांसपेशियों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकती है। इससे सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त होती है।
अगर गलती से à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल सà¥à¤ˆ रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ को ढकने वाली à¤à¤¿à¤²à¥â€à¤²à¥€ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा दे और फà¥à¤²à¥‚इड निकलने लगे तो इसकी वजह से तेज सिरदरà¥à¤¦ हो सकता है। हालांकि, à¤à¤¸à¤¾ बहà¥à¤¤ कम होता है।
नॉरà¥à¤®à¤² और सिजेरियन के अलावा और à¤à¥€ कई तरीकों से हो सकती है डिलीवरी
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यह पà¥à¤°à¤¸à¤µ का सबसे आम तरीका है और इस तरह की डिलीवरी को सबसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और फायदेमंद माना जाता है। इसमें दरà¥à¤¦ को कम करने या पà¥à¤°à¤¸à¤µ को जलà¥â€à¤¦à¥€ करने के लिठकिसी à¤à¥€ तरह की दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। कà¥à¤› महिलाओं को शिशॠकी हारà¥à¤Ÿ रेट मॉनिटर करने जैसी मेडिकल हेलà¥â€à¤ª की जरूरत पड़ सकती है।
नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी को महिलाओं के लिठसबसे सही माना जाता है, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है।
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यदि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में कोई परेशानी हो तो सिजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में मां के पेट पर कट लगाकर बचà¥â€à¤šà¥‡ को बाहर निकाला जाता है। यह à¤à¤• बड़ा ऑपरेशन होता है। कई महिलाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा से बचने के लिठसिजेरियन का विकलà¥â€à¤ª पहले से ही चà¥à¤¨ लेती हैं।
वहीं, अगर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान किसी तरह की जटिलता का पता चले या पेट में जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ या तीन बचà¥â€à¤šà¥‡ हों या बचà¥â€à¤šà¤¾ उलà¥â€à¤Ÿà¤¾ हो गया हो तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। इस सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को रिकवर करने में अधिक समय लगता है।
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इसमें कई तरह से डिलीवरी करवाई जाती है, जैसे कि :
फोरसेपà¥â€à¤¸ : बड़े चमà¥â€à¤®à¤š जैसा दिखने वाला उपकरण जिसे फोरसेपà¥â€à¤¸ कहते हैं। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° इससे शिशॠके सिर को पकड़ कर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर निकालते हैं।वैकà¥â€à¤¯à¥‚म à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥â€à¤¶à¤¨ : फोरसेपà¥â€à¤¸ की तरह ही वैकà¥â€à¤¯à¥‚म डिलीवरी होती है। इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° शिशॠके सिर पर पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• कप लगाकर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर खींचते हैं।à¤à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤“टोमी : इसमें योनि मà¥à¤– और गà¥à¤¦à¤¾ के बीच के ऊतक पर à¤à¤• कट लगाया जाता है। इस ऊतक को पेरिनियम कहते हैं। जब शिशॠको जलà¥â€à¤¦à¥€ से डिलीवर करवाना होता है, तà¤à¥€ इस तरह की डिलीवरी करवाई जाती है।à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टोमी : इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टिक थैली के खà¥à¤²à¤¨à¥‡ वाली जगह पर à¤à¤• छोटा पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• हà¥à¤• लगाते हैं। इसमें योनि से तेजी से पानी निकलता है।
हो सकता है कि जिन महिलाओं की पहले सिजेरियन डिलीवरी हà¥à¤ˆ हो, उनकी बाद में नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो। जब तक लेबर पेन शà¥à¤°à¥‚ नहीं होता, तब तक सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया जाता है। पहली बार में ऑपरेशन से डिलीवरी होने पर दूसरी बार नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो तो यूटà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ रपà¥â€à¤šà¤° का खतरा रहता है।
इस तरह कई पà¥à¤°à¤•ार की डिलीवरी होती हैं और पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के आधार पर ही डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° यह तय करते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की किस तरह की डिलीवरी करनी है।
नसों को नà¥à¤•सान
अगर दवा नसों में चली जाठतो कà¥à¤› मामलों में à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल की वजह से दौरे à¤à¥€ पड़ सकते हैं। à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल के लिठइसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाली सà¥à¤ˆ नस को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा दे तो शरीर के निचले हिसà¥â€à¤¸à¥‡ को महसूस करने की शकà¥â€à¤¤à¤¿ कà¥à¤› समय या हमेशा के लिठखो सकती है।
फिलहाल à¤à¤¾à¤°à¤¤ में लेबर पेन को कम करने के इन तरीकों का अधिक इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं किया जाता है, लेकिन फिर à¤à¥€ आप डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° से इसके बारे में सलाह जरूर ले सकती हैं।
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